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अति दुखद : भैया दूज पर मिला भाई का शव, बहन के टूटे सभी अरमान

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कहते हैं कि भाई की लंबी उम्र के लिए भैया दूज का त्यौहार मनाया जाता है और भाई अपनी बहन की रक्षा का वायदा करता है लेकिन राजधानी शिमला में एक ऐसा मामला सामने आया है कि भैया दूज पर भाई बहन से बिछड़ गया है और न ही बहन अपने भाई की लंबी उम्र के लिए भैयादूज मना पाई, वहीं भाई भी अब अपनी बहन की रक्षा करने का वायदा पूरा नहीं कर पाया। न जाने दीवाली की रात को कौन सा काल जानवर बनकर आया और एक ही आंगन में दीवाली का जश्न मना रहे भाई-बहन का आपसी प्यार तोड़ गया। भाई को जानवर आंगन से उठा कर ले गया था और बहन आंगन में ही चिल्लाती रही थी। यह मामला 4 नवम्बर देर शाम को सामने आया था।

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बहन सहित मां व बाप द्वारा यही उम्मीद जताई जा रही थी कि बच्चा सुरक्षित होकर वापस लौट आएगा लेकिन शनिवार को दोपहर बाद सूचना मिली कि जंगल में बच्चे का शव क्षत-विक्षत हालत में मिला है] ऐसे में बहन के अरमान टूट गए, वहीं मां-बाप सहित रिश्तेदारों के आंसू थमते हुए नजर नहीं आए। पूरे परिवार की दीवाली की खुशियां मातम में बदल गई हैं। आशंका जताई जा रही थी कि शायद कोई 5 साल के बच्चे को उठाकर ले गया होगा और बच्चा वापस मिल भी जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ बच्चे का सिर अलग तो शरीर के अन्य अंग अलग मिले हैं।

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रोते बिलखते हुई मां बोली कि उसने अपने लाल की अंतिम आवाज नाले में सुनी थी। जब वह नाले में पहुंची तो उसके बाद से उसकी कोई आवाज नहीं सुनाई दी थी। मां का कहना है कि जब देर शाम को बच्चे आंगन में खेल रहे थे तो तभी एकदम बच्चों के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। जैसे ही वह बाहर निकली तो तब तक बेटे को उठा लिया गया था। ऐसे में नाले में बच्चे की आवाज सुनाई दी। जब वह नंगे पांव से नाले की तरफ दौड़ी तो वहां पर कुछ नहीं था। मां के आंसू अब बिल्कुल भी नहीं थम रहे हैं। मां के मुंह से सिर्फ एक ही आवाज आ रही है कि उसका लाल वापस लौटा दो।

जैसे ही बच्चे की हड्डियां मिली तो पिता के होश उड़ गए। पिता ने रोते-बिलखते हुए कहा कि मैं सरकार से कोई मुआवजा नहीं लेना चाहता हूं। उन्हें पहले आशंका थी कि कोई लोग उनका बच्चा उठा कर ले गया है लेकिन अब जब हड्डियां बरामद हुई हैं तो यह पुख्ता हो गया कि ये हड्डियां मेरे बच्चे की ही हैं। अब मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरे बेटे को जानवर ने ही खाया होगा।

वन विभाग की कार्यप्रणाली पर अब लोगों के सवाल उठने शुरू हो गए हैं। यह घटना सामने आने के बाद अब लोगों के मुंह से एक ही बात निकल रही है कि शहर में जितने भी ऐसे प्वाइंट हैं, जहां पर तेंदुए का खौफ है, वहां पर पिंजरे लगाए जाने चहिए, क्योंकि जंगली जानवरों से अब लोगों के बीच काफी ज्यादा डर का माहौल पैदा हो गया है। वन विभाग तभी जागता हुुआ नजर आता है जब कोई घटना सामने आए। शहर में सबसे ज्यादा तेंदुए का आतंक डाऊनडेल, लक्कड़ बाजार से बड़श व शनान जाने वाला रास्ता, संजौली, नवबहार, फागली, नाभा, शोघी व टूटीकंडी सहित अन्य क्षेत्रों में है। यहां पर कई बार लोगों द्वारा तेंदुआ देखा गया है। वन विभाग को लोग कई बार लोग शिकायतें भी कर चुके हैं। कई बार इन क्षेत्रों में तेंदुए ने अटैक किया है।

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