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टूटा दुखों का पहाड़, दिहाड़ी से परिवार पाले या दिव्यांग बेटियों का करवाए इलाज

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2 बेटियां दिव्यांग हैं। हर जगह इलाज करवाकर थक चुके हैं। जो जमा-पूंजी थी वह बेटियों के इलाज पर खर्च हो चुकी है। अब गंभीर समस्या यह है कि दिहाड़ी लगाकर परिवार पाले या बेटियों का इलाज करवाएं। यह व्यथा है जिले के तहत विकास खंड बंगाणा की ग्राम पंचायत मोमन्यार के गांव समूरखुर्द के सुरेन्द्र कुमार की। उनकी 2 बेटियां दीया (6) व भावना (2) जन्म से दिव्यांग हैं। सुरेन्द्र कुमार पीजीआई में भी अपनी बेटियों का इलाज करवा चुके हैं। पहले वह हर सप्ताह पीजीआई बेटियों को लेकर जाते रहे लेकिन दिहाड़ी के अलावा आय का अन्य कोई साधन न होने के कारण वह अब कहीं भी इलाज करवाने के लिए नहीं जा पा रहे हैं।

अब परिजन एक ऐसे मसीहा के इंतजार में हैं जो उनकी मदद करे ताकि वह अपनी बेटियों को इलाज के लिए लेकर जा सकें। सुरेन्द्र कुमार के पिता जगत राम के मुताबिक अब सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि बीपीएल श्रेणी से उनका नाम काट दिया गया है। पहले बीपीएल श्रेणी में नाम होने के कारण उन्हें सस्ता राशन मिल जाता था लेकिन अब बीपीएल से नाम कटने के बाद उनकी हालत और भी खराब हो गई है। उन्हें कई दशक पहले मकान के निर्माण के लिए एक बार राशि मिली थी लेकिन इसके बाद उन्हें कोई लाभ नहीं मिला है।

इस परिवार के पास खाना बनाने के लिए एक कच्ची रसोई है जिसकी एक दीवार गिर गई थी। इस कच्चे मकान की आधी दीवार तो लगा दी गई लेकिन जब बारिश होती है तो बारिश का सारा पानी अंदर आ जाता है। ऐसे में बारिश के मौसम में उनके लिए खाना बनाना भी कठिन होता है। इस रसोई की हालत ऐसी है कि यह कभी भी गिर सकती है।

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